विश्व बालश्रम विरोधी दिवस पर सीएसीएल के जनबोध सभा में बोले संस्था प्रतिनिधि 

विश्व बालश्रम विरोधी दिवस पर सीएसीएल के जनबोध सभा में बोले संस्था प्रतिनिधि 

बालश्रमिकों की हो गणना, मिले पर्याप्त बजट

भोपाल – 12 जून 2019: विश्व बालश्रम विरोधी दिवस के अवसर पर बालश्रम विरोधी अभियान म.प्र. द्वारा जनबोध सभा का आयोजन स्थानीय राज्य संग्रहालय में किया गया । इस अवसर पर प्रदेश में बालश्रमिकों की स्थिति, चुनौतियों एवं अभियान की गतिविधियों को लेकर चर्चा की गयी | बाल आयोग सदस्य बृजेश चौहान ने बालश्रम को शर्म का विषय बताया | आपने कहा कि इससे पता चलता है कि देश में गरीबी और अमीरी की खाई कितनी गहरी है | बालश्रम के खात्मे और सभी बच्चों को सुरक्षा देने के लिए बाल आयोग संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा |

सीडब्ल्यूसी भोपाल सदस्य राजीव जैन ने कहा की बच्चों से जुड़े परिवार के रोजगार और पुनर्वास पर काम करके बालश्रम की समस्या को दूर किया जा सकता है | माया पाण्डेय ने बच्चों से जुड़े अपने अनुभव सुनाये | बाल पंचायत की तान्या जाटव ने बच्चों को शिक्षा और बड़ों को काम उपलब्ध कराने की अपेक्षा प्रकट की | संस्था सेव द चिल्ड्रेन के प्रदीप नायर एवं निवसीड के संजय सिंह ने प्रदेश सरकार से बच्चों की विशेष गणना किये जाने की मांग की | इसी दौरान बाल पंचायत प्रतिनिधियों ने पैनल को 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा | इन मांगों को लेकर प्रदेश के 30 जिलों में अभियान चलाया जायेगा | कार्यशाला के दूसरे सत्र में संस्था प्रतिनिधियों ने बाल श्रम विरोधी अभियान को जिला स्तर पर संचालित किये जाने की रणनीति तैयार की गयी | यहाँ संस्था टीडीएच प्रतिनिधि शर्मीली बासु ने टाइम टू टॉक और फ्राइडे फॉर फ्यूचर अभियान की जानकारी साझा की |

इन बच्चों का हुआ सम्मान –

इस अवसर पर शिक्षा में उत्कृष्ठ प्रदर्शन करने वाली बालिकाओं और काम छोड़कर शिक्षा से जुड़े बच्चों का सम्मान किया गया | इनमे सपना सेन , प्रिया सिर्सोदे , पूनम चौहान , पूजा नरवडे,पल्लवी सातनकर, सपना अहिरवार , राशी कुशवाहा , मालती मालवीय , ऊषा मौर्य , नम्रता , गायत्री बंसल शामिल रहे | इसके साथ ही बालश्रम से मुक्त होकर शिक्षा से जुड़े सुजाता, कोमल , करण, उषा को सम्मानित किया गया |

यह आयोजन संस्था निवसीड बचपन एवं सीएसीएल द्वारा टीडीएच, बीएमजेड, सेव द चिल्ड्रेन के सहयोग से किया जा रहा है। जनबोध सभा का सञ्चालन सत्येन्द्र पाण्डेय एवं आभार राजीव भार्गव ने किया |

आंकड़ों में उलझा बचपन

सिर्फ 3 स्लम में ही 266 बच्चे हैं वर्किंग चिल्ड्रेन

वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर के मौके पर जब दुनिया भर में चाइल्ड लेबर और वर्किंग चिल्ड्रेन की समस्या पर चिंता की जा रही है | तब राजधानी भोपाल सहित प्रदेश भर में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की स्थिति चिंता जनक बनी हुई है | हाल ही में भोपाल शहर के 12 नंबर स्टॉप स्थित स्लम पीसी नगर , मीरा नगर , ईश्वर नगर में नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ़ वूमेन चाइल्ड एंड यूथ डेवलपमेंट द्वारा किये गए सर्वेक्षण में चौंकाने वाले आंकड़े मिले हैं | यहाँ वार्ड 49-50 स्थित तीन स्लम में 6 से 14 वर्ष के 78 एवं 15 से 18 वर्ष के 188 वर्किंग चिल्ड्रेन पाए गए हैं | ये बच्चे लम्बे समय से स्कूल से ड्रॉपआउट होकर और कुछ परम्परागत काम और गरीबी की वजह से काम में लग गए हैं | इन स्लम के बालिकाओं की एक बड़ी संख्या संभ्रांत घरों में डोमेस्टिक लेबर के रूप काम कर रही है | इसके अलावा होटल एवं दुकान पर काम , पन्नी कबाड़ बीनना , पेपर बांटना , गैरेज आदि कामों में लगे हुए हैं |

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