कोरोना वायरस : देश में वेंटिलेटर की कमी को दूर करेगी चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की खोज

कोरोना वायरस : देश में वेंटिलेटर की कमी को दूर करेगी चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की खोज

एक वेंटिलेटर की सहायता से एक ही समय में बहुत से मरीजों के इलाज के लिए बनाया वेंटिलेटर स्प्लिटर

मोहाली (गुरनाम सागर): विश्व स्वास्थ्य संगठन (डल्यू एच ओ) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में रोगियों की संया में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन भारत के स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों में केवल ४८,००० वेंटीलेटर हैं। वर्तमान में, ऐसी स्थिति में, यदि देश में रोगियों की सं2या में ज्यादा वृद्धि होती है, तो देश की जनसं2या के अनुसार यह बहुत चिंताजनक विषय है। वेंटिलेटर्स की कमी को पूरा करने के लिए, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के अनुसंधान और विकास विभाग ने अल्ट्रा आधुनिक ३डी प्रिंटिंग तकनीक की मदद से अनूठी खोज की है। ३डी प्रिंटिंग की सहायता से तैयार किए गए २,३ तथा ४ तरफा वेंटिलेटर स्प्लिटर से देश में वेंटिलेटर की पूर्ति करते हुए कम समय में ४ गुना मरीजों का इलाज किया जा सकता है।

डिवाइस के निर्माता और विश्वविद्यालय के अनुसंधान और विकास विभाग में सहायक प्रोफेसर और रिसर्च स्कॉलर, रणविजय कुमार ने कहा कि उन्होंने सेंटर फॉर यूनिवर्सिटी में टे1नोलॉजी बिजनेस इन1यूबेटर (टीबीआई) सेंटर में २, ३ तथा ४ तरफा वेंटिलेटर स्प्लिटर का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि २, ३ तथा ४ तरफा स्प्लिटर बनाने में उन्होंने पॉलीसए1िटक एसिड (पीए) का प्रयोग किया है, जिसे पॉलीसेकटाइड (पीएलए) एसिड भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि पीएलए एक गैर-विषैला पदार्थ है, अत: इसके उपयोग से पहले इसकी साइटोटॉ1िससिटी के लिए परीक्षण किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा ३ डी वेंटिलेटर स्प्लिटर का निर्माण स्वास्थ्य देखभाल एजेंसियों के मापदंडों के अनुसार किया गया है। उन्होंने बताया कि वेंटिलेटर स्प्लिटर एक ऐसा उपकरण है, जो एक समय में दो से चार रोगियों के फेफड़ों को आवश्यक ऑ1सीजन पहुंचाने में मदद करता है। जबकि एक वेंटिलेटर की मदद से दो से चार गुना रोगियों का इलाज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह हर मरीज की जरूरत के अनुसार ऑ1सीजन की आपूर्ति करेगा, जैसे कि एक रोगी युवा और दूसरा बुजुर्ग, इसलिए बुजुर्गों को अधिक ऑ1सीजन की आवश्यकता के अनुसार ऑ1सीजन की सप्लाई करेगा। विभिन्न रोगियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, इसमें ऑ1सीजन के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए भी व्यवस्था की गई।

कोरोना वायरस पूरी दुनिया के लिए चुनौती बन गया है, जिसके चलते भारत में इस महामारी का प्रकोप दिन प्रति दिन बढ़ रहा है। पूरे विश्व में कोरोना पीड़ितों की गिनती ११ लाख को पार कर गई है तथा ६५,००० लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार भारत में मरीजों की गिनती ३५०० तक पहुंच गई है। कोरोना वायरस संक्रमित रोगियों के फेफड़ों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है, जिसकी वजह से रोगी के शरीर में खून के दबाब में ऑक्सीजन की मात्रा में कमी हो जाती है, जिसके कारण रोगी को सांस लेने में तकलीफ होती है। इस मामले में, वेंटिलेटर एक चिकित्सा उपकरण है, जो संक्रमित रोगी में आ1ॅसीजन की आवश्यक मात्रा को बनाए रखने में सहायक होता है।

चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के अनुसंधान और विकास विभाग के प्रमुख डॉ. संजीत सिंह ने कहा कि भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग यूनिवर्सिटी में एक टे1नोलॉजी बिजनेस इ1न्यूबेटर (टीबीआई) केंद्र की स्थापना की है, जिसके प्रोज1ेट के तहत यह शोध कार्य शुरू किया गया था। संजीत ने कहा कि 3 तथा 4 तरफा ऑ1सीजन स्प्लिटर को यूनिवर्सिटी ने परीक्षण और प्रमाणन के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) को भेजा है, जिसकी मंजूरी के उपरांत स्थिति के मद्देनजर बड़े स्तर पर स्प्लिटर उत्पादन की शुरुआत की जाएगी, ताकि कीमती मानव जीवन समय रहते बचाया जा सके।

इस संबंधी जानकारी देते हुए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर स. सतनाम सिंह संधू ने कहा कि पूरी दुनिया कोरोना वायरस के प्रकोप से बुरी तरह से ग्रस्त है, ऐसे में बचाव कार्यों के साथ साथ अनुसंधान कार्य की भूमिका महत्त्वपूर्ण बन चुकी है। उन्होंने कहा कि देश की सभी खोज संस्थानों व संस्थाओं को ऐसी खोज के लिए बड़े पैमाने पर कार्य करने के लिए आगे आना चाहिए। स. संधू ने कहा कि ३ डी चिकित्सा संस्थानों को रोगियों के इलाज के लिए एक मह8वपूर्ण चिकित्सा उपकरण बनाकर कोरोनो वायरस के खिलाफ युद्ध स्तर पर कार्य करना समय की मांग बन चुका है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी द्वारा कोरोना वायरस स6बन्धी खोज कार्यों के लिए विशेष बजट का प्रावधान किया गया है।

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